आश्रम व्यवस्था

भूमिका आश्रम शब्द की व्युत्पत्ति ‘श्रम’ धातु से हुई है जिसका अर्थ है – ‘परिश्रम अथवा प्रयास करना।’ अतः आश्रम वह स्थान है जहाँ पर प्रयास किया जाये। ‘इस प्रकार आश्रम व्यवस्था से अभिप्राय एक ऐसी व्यवस्था से है जिसमें व्यक्ति की जीवनयात्रा में कुछ सोपान या चरण निर्धारित किये गये हैं, जहाँ वह एक …

आश्रम व्यवस्था Read More »

प्राचीन भारत में ‘दास प्रथा’

परिचय दास विधिक रूप से किसी अन्य व्यक्ति के स्वामित्व में होता है और अपने स्वामी के लिए काम करने के लिए बाध्य है। दास अपने निर्णय स्वयं नहीं ले सकता। दास होने की अवस्था ही ‘दास-प्रथा’ कहलाती है। अब तक जितनी संस्कृति और सभ्यताएँ हुई हैं उन सबमें यह प्रथा रही है। भारतीय सभ्यता …

प्राचीन भारत में ‘दास प्रथा’ Read More »

प्राचीन भारतीय सम्वत्

प्राचीन भारतीय सम्वत् भारत में अति प्राचीन काल से ही सम्वत् का प्रचलन था। प्राचीन अभिलेख और साहित्यों में इसका उल्लेख है। प्राचीन भारतीय सम्वतों में विक्रम और शक सम्वत् सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। कुछ प्रसिद्ध प्राचीन भारतीय सम्वत् निम्न हैं :— सम्वत् का नाम समय प्रणेता विक्रम सम्वत् ५७ ई॰पू॰ उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य शक …

प्राचीन भारतीय सम्वत् Read More »

भारतवर्ष का नामकरण

भूमिका हमारे देश भारत का नाम ऋग्वैदिक जन ‘भरत’ के नाम पर भारतवर्ष पड़ा है। यद्यपि भारतीय संविधान के अनुच्छेद – १ में इसे ‘भारत अर्थात् इंडिया’ कहा गया है। भारतवर्ष शब्द के प्रयोग का अभिलेखीय साक्ष्य सर्वप्रथम खारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख में मिलता है। यहाँ पर यह शब्द गंगा घाटी या उत्तरी भारत के संदर्भ में …

भारतवर्ष का नामकरण Read More »

भारत और तिब्बत सम्पर्क

भूमिका तिब्बत उत्तर में कुललुन एवं दक्षिण में हिमालय पर्वत शृंखला से घिरा एक पठारी क्षेत्र है। वर्तमान में यह चीन का स्वायत्त क्षेत्र है। इसका उल्लेख महाभारत और कालिदास कृत रघुवंश में ‘त्रिविष्टप’ नाम से मिलता है। तिब्बत के साथ भारत का सम्पर्क बौद्ध धर्म के माध्यम से हुआ। तिब्बत में भारतीय सभ्यता और …

भारत और तिब्बत सम्पर्क Read More »

विक्रमशिला विश्वविद्यालय

संस्थापक पालवंशी शासक ‘धर्मपाल’ ( ७७० – ८१० ई॰ )। स्थान पथरघाट पहाड़ी, भागलपुर जनपद; बिहार। समय इसकी स्थापना आठवीं शताब्दी में हुई। यह आठवीं से १२वीं शताब्दी के अंत तक अस्तित्व में रहा। प्रसिद्ध विद्वान दीपंकर श्रीज्ञान ‘अतीश’, अभयांकर गुप्त, ज्ञानपाद, वैरोचन, रक्षित, जेतारी, शान्ति, रत्नाकर, मित्र, ज्ञानश्री, तथागत, रत्नवज्र आदि। पतन तुर्की आततायी …

विक्रमशिला विश्वविद्यालय Read More »

बलभी विश्वविद्यालय

भूमिका  बलभी विश्वविद्यालय ( वल्लभी विश्वविद्यालय ) की स्थापना गुप्तशासन के सैन्याधिकारी भट्टार्क ( मैत्रक वंश ) द्वारा की गयी थी। यह गुजरात के भावनगर जिले के ‘वल’ नामक स्थान पर स्थित था। यह हीनयान बौद्ध धर्म की शिक्षा का केंद्र था। इसका समयकाल ५वीं शताब्दी से १२वीं शताब्दी तक था। बलभी गुप्त शासन के पतन के …

बलभी विश्वविद्यालय Read More »

नालंदा विश्वविद्यालय

भूमिका नालंदा विश्वविद्यालय ( महाविहार ) की स्थापना ५वीं शताब्दी में कुमारगुप्त-प्रथम के शासनकाल में हुई थी। नालंदा वर्तमान समय का “बड़गाँव” है जो पटना शहर से लगभग ९५ किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। वर्तमान में यह बिहार राज्य का एक जनपद भी है – नालंदा ( बिहार शरीफ )। इसका समयकाल ५वीं शताब्दी से १२ वीं …

नालंदा विश्वविद्यालय Read More »

तक्षशिला विश्वविद्यालय

भूमिका तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिंडी जनपद में स्थित था। महाजनपद काल में तक्षशिला गंधार राज्य की राजधानी थी। तक्षशिला विश्वविद्यालय का समयकाल  ६ठवीं शताब्दी ईसा पूर्व से ७वीं शताब्दी ईस्वी तक माना जाता है। तक्षशिला का इतिहास रामायण के अनुसार श्रीराम के भाई भरत ने इस क्षेत्र को गंधर्वों से विजित किया था। गंधर्व …

तक्षशिला विश्वविद्यालय Read More »

हड़प्पा सभ्यता या सिन्धु घाटी सभ्यता

 हड़प्पा सभ्यता या सिन्धु घाटी सभ्यता भूमिका कांस्य युगीन सभ्यता के अन्तर्गत हड़प्पा सभ्यता आती है। जब ताँबे में टिन को मिलाकर कांस्य नामक मिश्रधातु का प्रयोग मानव ने किया। कांस्य सभ्यता सामान्यतः नगरीय सभ्यता कहलाती है। भारतीय उप-महाद्वीप में प्रथम नगरीकरण इसी समय हुआ। हड़प्पा सभ्यता ‘आद्य इतिहास’ के अन्तर्गत आता है। इसे इस …

हड़प्पा सभ्यता या सिन्धु घाटी सभ्यता Read More »