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ऐहोल ( Aihole )

भूमिका ऐहोल ( Aihole ) कर्नाटक प्रांत के बागलकोट जनपद में मालप्रभा नदी के तट पर स्थित है।  इसको मन्दिरों का नगर’ ( Town of Temples ) भी कहा गया है। यहाँ से लगभग ७० मन्दिरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। जैन कवि रविकीर्ति विरचित पुलकेशिन् द्वितीय का ऐहोल अभिलेख भी...

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एलोरा की गुफाएँ ( Ellora Caves )

भूमिका एलोरा महाराष्ट्र प्रान्त के औरंगाबाद जनपद में स्थित है। यह औरंगाबाद से २९ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और अजन्ता से १३५ किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। पास में ही ‘वेलगंगा नदी’ प्रवाहित होती है। यहाँ से मिले उत्कीर्ण अभिलेख के अनुसार इसका प्रचीन नाम ‘एलापुर अंचल’ था। इसका एक अन्य नाम ‘वैरूल’ भी...

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एरण्डपल्ल ( Erandpalla )

भूमिका एरण्डपल्ल ( Erandpalla or Erandapalla ) की पहचान आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम् जनपद में स्थित इसी नाम के स्थान से की गयी है। एरण्डपल्ल – पहचान और विवाद इतिहासकार फ्लीट ( J.F. Fleet )१ ने एरण्डपल्ल का समीकरण खानदेश के एरण्डोल ( erandol ) नामक स्थान से किया है। के०...

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एलीफैंटा

स्थिति एलीफैंटा या एलीफेंटा द्वीप ( Elephanta island ) वर्तमान मुम्बई से लगभग १० किमी० पूर्व और मुख्य भूमि से लगभग ३ किमी० पश्चिमी में स्थित है। एलीफैंटा द्वीप का आकार ज्वार के प्रभाव में १० से १६ वर्ग किमी० क्षेत्रफल में घटता-बढ़ता रहता है। इसका पूर्व नाम धारापुरी था जो...

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एरण या एरकिण

भूमिका एरण मध्य प्रदेश के सागर जनपद में मालवा के पठार से बहने वाली बेतवा की सहायक बीना नदी के तट पर स्थित है। इसका एक अन्य प्रचीन नाम ‘एरकिण’ भी मिलता है। एरण का संक्षिप्त इतिहास  इसका इतिहास प्रागैतिहासिक काल तक जाता है। यहाँ से चार सांस्कृतिक स्तर मिलते हैं...

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अमरावती – प्राचीन बौद्ध स्थल

परिचय अमरावती शब्द का अर्थ है – स्वर्ग। इस नाम के कई स्थान हैं – एक, महाराष्ट्र का अमरावती जनपद है; द्वितीय, अभी हाल में विभाजित आंध्रप्रदेश की राजधानी का अमरावती नाम से नवनिर्माण चल रहा और तृतीय, प्राचीन अमरावती स्थल। हम यहाँ पर प्राचीन अमरावती की बात कर रहे हैं।...

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अरिकामेडु या पुडुके

परिचय अरिकामेडु ( Arikamedu ) के पुरावशेष भारत-रोम के व्यापारिक सम्बन्ध पर प्रकाश डालते हैं। यह संघ शासित राज्य पुदुचेरी ( पाण्डिचेरी ) से लगभग ३ किलोमीटर दक्षिण में जिंजी नदी के तट पर स्थित दक्षिण भारत का एक प्रसिद्ध पुरास्थल है। ‘पेरीप्लस ऑफ इरिथ्रियन सी’ में इसका नाम ‘पोडुके या...

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परिवार या कुटुम्ब ( Family ) का उद्भव और विकास

प्रस्तावना परिवार एक पुरातन सामाजिक संस्था है।  सम्भवतः कुटुम्ब जितनी ‘नैसर्गिक’ अन्य कोई सामाजिक संस्था नहीं है। प्रचीन से लेकर अर्वाचीन संसार की सभी सभ्यताओं में कुटुम्ब का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है और रहेगा। इस संस्था का कोई अतिक्रमण नहीं कर सकता है। यह सामाजिक जीवन की मूलभूत ईकाई है। व्यक्ति...

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जाति-प्रथा का उद्भव और विकास

भूमिका जाति-प्रथा भारतीय समाज की ऐसी विशेषता है जो अन्यत्र इस प्रकार नहीं पायी जाती है। मजे की बात तो यह है यह हिन्दू समाज की विशेषता तो है ही साथ ही इससे मुस्लिम और ईसाई समाज भी अप्रभावित नहीं रहा है। जिस कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था की आधारशिला वैदिक काल...

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भारतीय धर्म और दर्शन में ईश्वर की अवधारणा या ईश्वर-विचार ( The concept of God in Indian Religion and Philosophy )

परिचय भारतीय दर्शन पर धर्म की अमिट छाप है इसलिए ईश्वर का महत्वपूर्ण स्थान है। सामान्यतः ईश्वर में विश्वास को धर्म कहा जाता है। धर्म-प्रभावित भारतीय दर्शन में ईश्वर की चर्चा पर्याप्त रूप से मिलती है। चाहे वे ईश्वरवादी दर्शन हों या अनीश्वरवादी अपनी-अपनी बातों को प्रमाणित करने हेतु वे अनेकानेक...

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