धर्म और दर्शन

योग दर्शन

योग दर्शन परिचय भारतीय दर्शनों में योग ही वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक लोकप्रिय है। योग हमें आत्मशुद्धि और आत्मनियंत्रण का व्यावहारिक मार्ग बताता है। २१ जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। योग दर्शन सांख्य के साथ घनिष्ठ रूप से सम्बंधित है। यह सांख्य दर्शन का व्यावहारिक पक्ष है। इसके प्रवर्तक …

योग दर्शन Read More »

बौद्ध धर्म के अन्य प्रमुख उपसम्प्रदाय

बौद्ध धर्म के अन्य प्रमुख उपसम्प्रदाय   वज्रयान ईसा की पाँचवीं या छठवीं शताब्दी से बौद्ध धर्म के ऊपर तंत्र-मंत्रों का प्रभाव बढ़ने लगा जिसके फलस्वरूप वज्रयान नामक नये सम्प्रदाय का जन्म हुआ। इस विचाधारा में मंत्रों और तांत्रिक क्रियाओं द्वारा मोक्ष प्राप्त प्राप्ति का मार्ग प्रस्तुत किया गया। वज्रयान विचारधारा में ‘वज्र’ को एक …

बौद्ध धर्म के अन्य प्रमुख उपसम्प्रदाय Read More »

महायान की शाखाएँ

महायान की शाखाएँ   माध्यमिक ( शून्यवाद ) सम्प्रदाय इस मत के प्रवर्तक नागार्जुन हैं। नागार्जुन ने ‘माध्यमिककारिका’ की रचना की। इसे सापेक्षवाद भी कहा जाता है, जिसके अनुसार प्रत्येक वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न हुई है और वह पर-निर्भर है। नागार्जुन ने ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ को ही शून्यता कहा है। इस मत में महात्मा …

महायान की शाखाएँ Read More »

हीनयान की शाखायें

भूमिका हीनयान की शाखायें दो हैं। एक – वैभाषिक उपसम्प्रदाय और द्वितीय- सौत्रान्तिक उपसम्प्रदाय। जिनका विवरण निम्नवत है। वैभाषिक उपसम्प्रदाय यह बौद्ध धर्म के हीनयान शाखा का उपसम्प्रदाय है। इसकी उत्पत्ति कश्मीर में हई। विभाषाशास्त्र पर आधृत होने के कारण इसे वैभाषिक नाम दिया गया। वैभाषिक मतानुयायी ‘चित्त और बाह्य वस्तु’ के अस्तित्व को स्वीकार …

हीनयान की शाखायें Read More »

बौद्ध संगीतियाँ

बौद्ध संगीतियाँ बौद्ध धर्म की विकास-यात्रा में ४ बौद्ध संगीतियों / महासभाओं का महत्वपूर्ण स्थान है :— प्रथम बौद्ध संगीति  स्थान – सप्तपर्णि गुफा, राजगृह समय – ४८३ ई०पू० शासनकाल – अजातशत्रु  अध्यक्ष – महाकस्सप उद्देश्य – बुद्ध की शिक्षाओं का संकलन करना था।  महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तत्काल बाद यह संगीति आयोजित की गयी।  …

बौद्ध संगीतियाँ Read More »

बौद्ध संघ

 भूमिका बौद्ध संघ का बौद्ध धर्म में महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह बौद्ध त्रिरत्नों ( बुद्ध, धम्म और संघ ) में शामिल है। ऋषिपत्तन में अपना प्रथम उपदेश ( धर्मचक्रप्रवर्तन ) देने के बाद बुद्ध ने पाँच ब्राह्मण शिष्यों के साथ बौद्ध संघ की स्थापना की थी। बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में संघ ने महती भूमिका का निर्वहन …

बौद्ध संघ Read More »

बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार

बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार परिचय बोधगया में ज्ञानोदय बाद महात्मा बुद्ध ने प्राप्त ज्ञान को लोगों तक पहुँचाने का निर्णय लिया। इसके लिए वे जीवनपर्यंत प्रयासरत रहे। बुद्ध वर्षा ऋतु में विभिन्न नगरों में विश्राम करते और शेष आठ माह एक स्थान से दूसरे स्थान भ्रमण करके अपने मत का प्रचार करते।   धर्मचक्रप्रवर्तन गया …

बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार Read More »

महात्मा बुद्ध के उपदेश और शिक्षायें

महात्मा बुद्ध के उपदेश और शिक्षायें परिचय ज्ञान प्राप्ति के बाद महात्मा बुद्ध ने अपने मत के प्रचार का निश्चय किया। ज्ञान की प्राप्ति से लेकर जीवन के अंतिम समय तक वो अपने मत के प्रचार-प्रसार में लगे रहे।   धर्मचक्रप्रवर्तन ज्ञान को पा लेने के बाद महात्मा बुद्ध गया से ऋषिपत्तन / मृगदाव ( …

महात्मा बुद्ध के उपदेश और शिक्षायें Read More »

बौद्ध दर्शन

बौद्ध दर्शन    परिचय बुद्ध अनेक पेचीदे दार्शनिक प्रश्नों पर मौन रहे; जैसे — यह संसार नित्य और शाश्वत है अथवा नहीं। बुद्ध की मान्यता थी कि किसी रोग के कारण के बारे में जानने या वाद-विवाद में समय व्यतीत करने से उत्तम है कि उसके निदान का प्रयास तुरंत किया जाय। इस सम्बन्ध में …

बौद्ध दर्शन Read More »

गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध  भूमिका ई०पू० छठवीं शताब्दी के नास्तिक सम्प्रदाय के आचार्यों में गौतम बुद्ध का नाम सूर्य के समान देदीप्यमान है। जिस धर्म का उन्होंने प्रवर्तन किया वह कालान्तर में एक अन्तर्राष्ट्रीय धर्म बन गया।  यदि विश्व के ऊपर उनके मरणोत्तर प्रभावों के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाय तो वे भारत में जन्म लेने …

गौतम बुद्ध Read More »